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Monday, 18 January 2016

सोशल नेटवर्किंग साइट्स डिप्रेशन को दावत दे रहीं

मोबाइल फ़ोन  और इंटरनेट की दुनिया ने आज हमारे लाइफ स्टाइल को बदल कर रख  दिया है। आज हम हर तरफ से मोबाइल, इंटरनेट से घिरे हुए हैं, सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने तो मानो जैसे हमको पूरी तरह से अपने वश में कर लिया हो. खासकर की युवा वर्ग के छात्र-छात्राएं तो 24 घंटे में 16-16 घंटो तक या तो इन साइट्स पर ऑनलाइन रहते हैं या फिर दिन रात मोबाइल फ़ोन पर लगे रहते हैं। रास्ते में चलते-चलते भी उनके हाथों की उंगलियां मोबाइल फ़ोन के कीपैड पर ही रहती हैं. मोबाइल फ़ोन भी सोचता होगा कमवख्त किसके हाथो  में आ गया कभी आराम ही नहीं लेने देता.

कुछ यूं कह लीजिये की इस मोबाइल फ़ोन, फेसबुक और इंटरनेट पर हमारी एक अलग ही दुनिया है, एक ऐसे लोगों की दुनिया जिनसे हम कभी मिले भी नहीं होते, दुनिया के किसी  भी कोने में रहने वाला आदमी हमारा दोस्त बन जाता है, जबकि हमको अपनी वास्तविक दुनिया के बारे में कुछ खबर  नहीं होती।  हमारे पास इतना समय भी नहीं होता कि अपने आसपास में रहने वाले लोगो के सुख-दुःख में शरीक हो.

लेकिन अगर हम अपने अंदर झांककर देखें, खुद के बारे में थोड़ा विश्लेषण करें तो हम पाएंगे की मोबाइल, सोशल साइट्स, इंटरनेट से घिरे होने के बाद भी हमारे जीवन में एक अकेलापन है, जो धीरे धीरे हमारे अंदर डिप्रेशन को पैदा कर देता है।  शुरुवात में हमको इसका पता नही लगता लेकिन जब बाद में खुद को परेशानियों से घिरा पाते हैं, जब ये  फेसबुक के दोस्त काम नही आते. तब हमको इस अकेलेपन का अहसास होता है और  ये एक ऐसे डिप्रेशन को जन्म देता है जो हमे एक सजा की तरह लगने लगता है।  इस पोस्ट में हम इन सभी चीज़ो के बारे में विस्तार से थोड़ा बताने की कोशिश कर रहे हैं। 
आज का दृश्य ये है कि युवा वर्ग में खुद को बिंदास, हाई प्रोफाइल दिखने की होड़ मची हुयी है क्योंकि आजकल हर किसी के अंदर  खुद को दूसरों से अलग दिखाने की एक आग भड़क रही है. भले  ही फेसबुक, व्हाट्स एप्प, टिवटर पर दोस्तों के नाम पर हमारी एक लम्बी लिस्ट क्यों न हो लेकिन असल जिंदगी में अकेलापन और डिप्रेशन फैला हुआ है। जब तक हमारे फेसबुक स्टेटस को अच्छे खासे लाइक्स या सकारात्मक कमेंट नहीं मिलते तब तक हमको शांति नही मिलती और अगर एक भी लाइक नहीं मिलता या नेगेटिव कमेंट मिलता है तो हम निराश होने लगते हैं, डिप्रेस होने लगते हैं, हम ये सोचने में व्यस्त हो जाते हैं की उसके स्टेटस पर तो इतने लाइक  मिले थे मेरे पर एक भी नहीं, मानो जैसे हमारे बीच  एक  ऐसी होड़ सी लगी रहती है जो हमारे लिए महत्वपूर्ण ही नही होती.

केवल युवा वर्ग ही नही बल्कि 30 से 50 साल के बीच के कर्मचारीगण भी इस रेस में पीछे नही हैं। आजकल हमको सरकारी दफ्तरों में भी ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं. वह लोग इंटरनेट का गलत प्रयोग करते हैं.  अभी कुछ दिनों पहले का एक सीन था एक सरकारी बैंक का मैं काउंटर पर अकॉउंट में कैश जमा करने की लाइन लगा हुआ था. लाइन में कम ही लोग लगे हुए थे. इसलिए कैशियर महाशय ज्यादा  सीरियस होकर काम नहीं कर रहे थे. तभी अचानक उनके मोबाइल फ़ोन पर एक मैसेज आता है और वो ग्राहक का काम छोड़कर उस मैसेज का रिप्लाई करने लगते हैं. अब वो मैसेज मोबाइल मैसेज था या मोबाइल में फेसबुक ऑनलाइन का मैसेज था ये मुझे नहीं पता. रिप्लाई भजने के बाद वो फिर ग्राहक के काम पर ध्यान देते हैं. अभी अगले ग्राहक की बारी आई भी नहीं थी की उनके मोबाइल पर फिर मैसेज आता है और वो फिर रिप्लाई भेजते  हैं. ऐसा 5 से 10 मिनट के भीतर कम से कम 4 बार हुआ तभी लाइन में खड़े एक महाशय ने कहा सर आप पहले अपने मोबाइल का जरूरी काम खत्म कर ले फिर हमारा काम करना ये सुनने के बाद केशियर महाशय  के चेहरे  के  हाव-भाव  थोड़ा बदल गए और वो गुस्सा होकर ग्राहक के काम पर ध्यान देने लगे. 

अभी हाल ही में हुए एक अध्ययन में ये पाया गया है की देश की राजधनी दिल्ली में सबसे अधिक लोग डिप्रेशन के शिकार हैं और ख़ास बात ये है की महिलाओं की हालत पुरुषों से ज्यादा  गंभीर है. इस अध्ययन में ये पाया गया की की फेसबुक सोशल नेटवर्किंग पर चैटिंग करने वाले दोस्त भले ही कुछ समय के लिए हमें अपने साथ होने का या अकेलेपन दूर होने का आभास जरूर कराते हैं, लेकिन एक साथ बैठकर हंसना, बात करना, एक दूसरे की मदद करने जैसे अहसासों से कोसों दूर हैं.   साथ ही साथ ये हमको परेशानी में काम आने वाले या हमारी जिन्दी के सजीव मार्गदर्शक और मानवीय सहारे जैसी भावनाओं से भी दूर रखते हैं. 

बड़े शहरों में आजकल न्यूक्लियर फैमिली का चलन थोड़ा बढ़ गया है, जिसके सहलते आज कल के बच्चो के परवरिश दादा-दादी, नाना-नानी के की छत्रछाया में बड़े नहीं हो पाते जिसके कारण आज कल के बच्चो में बुजुर्गो द्वारा सिखाये गए अनुभव की कमी है. बल्कि सत्य तो ये है की वो अपने किसी काम में उनकी मदद लेना निर्थक समझते हैं और उनको "बैकवर्ड " जैसे शब्दों से उनको  सम्बोधित करते हैं.

नकारात्मक प्रभाव 

मोबाइल फ़ोन, सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे फेसबुक, व्हाट्सऐप आदि से दिन भर घिरा रहना वास्तव में हमारे लिए लिए नुक्सानदायक है. इसके कुछ दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं-
  • हमारे दिनचर्या के जरूरी काम अधूरे रह जाते हैं या  फिर पेंडिंग में पड़े रहते हैं और कभी कभी तो हम उनको थोड़ा करने के बाद  भूल ही जाते हैं।  
  •  जब हम फेसबुक या व्हाट्सप्प या मोबाइल पर दोस्तों को किसी जरूरी काम से मैसेज करते हैं और अगर उस समय वो दोस्त ऑनलाइन हुआ तो ये एक मिनट का मैसेज भेजने का काम कब घंटो तक होने वाली चैट में बदल जाता है पता ही नही लगता नतीजन व्यर्थ में समय ख़राब होता है।    
  •  कभी कभी तो ऐसा होता है की फेसबुक पर हम अपने जिस दोस्त से चैट कर रहे होते हैं अगर वो हमको कुछ गलत या ऐसा बोल देता है जो हमको पसंद नहीं, या फिर वो हमारा कहना नही मानता है तो हम टेंसन में आ जाते हैं, हमारा मूड ख़राब हो जाता है और बाकी के जरूरी कामो पर भी इसका असर पड़ता है।  
  •  हमारी कार्यकुशलता और उसकी गुणवत्ता भी  घटती है।  
  •  डिप्रेशन और कभी कभी दूसरो के प्रति ईर्ष्या भाव भी पनपता है।  
  • अपने सजीव मित्रो  और पारिवारिक सदस्यों या सगे सम्बन्धियों के   लिए समय नही निकाल पाते नतीजन रिश्तो  पर असर पड़ता है
दुष्प्रभावों  से ऐसे  बचें
  •   जरूरत पड़ने पर ही ऑनलाइन आएं।  
  •  कोशिश करें कि दोस्तों को भेजा गया मैसेज, मैसेज तक ही सिमित रहे उसको घंटो की चैट में तब्दील न करें।  
  • डिप्रेशन से बचने के लिए प्रतदिन थोड़ा व्यायाम करें।  
  •  अपने सजीव मित्रों, बड़े बुजर्गों, पारिवारिक सदस्यों के साथ थोड़ा वक़्त बिताये किसी निर्णय को लेते समय फेसबुक दोस्तों की अपेक्षा उनको जयदा महत्त्व दें।  
  •  अपने फेसबुक स्टेटस के कम लाइक देखकर टेंसन न ले या चैट करते समय कोई आपको नापसंद आने वाली बात कह देता है तो उसको महत्व न दे इन बातो को इग्नोर करें।  
  • अपने जरूरी कामो को पहले समाप्त करें।  
  • रास्ते में सड़के पर चलते समय मोबाइल पर नेट या मैसेज न करे।  

नोट- इस पोस्ट का उदेश्य किसी भी सोशल साइट्स के मूलभावों को ठेस पहुचाना  नहीं है, बल्कि इन साइट्स के सद्उपयोगों को महत्त्व देना है।  फेमश सोशल साइट्स फेसबुक भी यही कहती है कि फ्रेंड रिक्वेस्ट उनको ही भेजें जिनको आप जानते हों। 

                                                                                                   Writtern by Manoj Kumar

लेखक परिचय:

मनोज कुमार युवा एवं उत्साही लेखक हैं तथा 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' के सक्रिय सदस्य के रूप में जाने जाते हैं। 

आप जून 2009 से ब्लॉग जगत में सक्रिय हैं और नियमित रूप से अपने ब्लॉग 'डायनमिक' के द्वारा विज्ञान संचार को मुखर बना रहे हैं। 

Thursday, 14 January 2016

ई-मेल पढ़कर कमाएं पैसा, एक महीने में मिलेंगे 10 हजार रु

1. मनी मेल डॉट कॉम(www.Moneymail.in) 


इस वेबसाइट पर आप दिन में 15 मिनट का समय निकालकर ई-मेल पढ़कर कमाई कर सकते हैं। इसके जरिए 10,000 रुपए तक एक महीने में कमा सकते हैं। एक ईमेल पढ़ने पर आपको 20 पैसे से लेकर 200 रुपए तक दिए जाते हैं। इसके लिए आपको हर रोज अपने अकाउंट पर लॉग इन करना होगा और इनबॉक्स में मेल पढ़ने होंगे। अपने किसी दोस्त का अकाउंट बनवाने पर आपको 100 रुपए तक दिए जाते हैं।

2. सेंडर अर्निंग डॉट कॉम (www.Sendearnings.com) 

इस वेबसाइट पर भी आप ईमेल, सर्वे, ऑनलाइन शॉपिंग के माध्यम से पैसा कमा सकते हैं। पहले आपको अकाउंट बनाना होगा और अपना रजिस्ट्रेशन कन्फर्म कराना होगा। यहां आपको एक ईमेल पढ़ने पर 1 डॉलर यानी करीब 60 से 65 रुपए(डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत के अनुसार) दिया जाता है। अगर आपने 6 महीने में एक बार इस साइट पर विजिट नहीं किया, तो आपका अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया जाएगा। पेमेंट के लिए आवेदन करते समय आपके अकाउंट में कम से कम 30 डॉलर यानी तकरीबन 1800 से 2000 रुपए होने चाहिए।

3. मैट्रिक्स मेल डॉट कॉम (www.matrixmails.com) 

ई-मेल के जरिए पैसा कमाने के लिए ये वेबसाइट एक बेहतर विकल्प है। साल 2002 से यह वेबसाइट काम कर रही है। इस वेबसाइट के माध्यम से आप ईमेल पढ़ते हुए, ऑफर्स के माध्यम से, साइट विजिट करें और अन्य लोगों को इसकी जानकारी देकर पैसे कमा सकते हैं। आप 25 से 50 डॉलर तक यानी तकरीबन 3000 रुपए एक घंटे में कमाए जा सकते हैं।

4. कैश फॉर ऑफर डॉट कॉम (www.Cash4offers.com) 

इस वेबसाइट के माध्यम से भी आप पैसा कमा सकते हैं। जब आप वेबसाइट के गोल्ड मेंबर बन जाते हैं, तो 72 घंटे से भी कम समय में आपको पेमेंट कर दी जाती है। आप ईमेल पढ़कर, सर्वे के द्वारा, कैश ऑफर्स के माध्यम से, ऑनलाइन गेम्स खेलकर और दोस्तों का अकाउंट बनवाकर पैसा कमा सकते हैं। वेबसाइट पर साइन इन करते ही आपको करीब 5 डॉलर यानी 300 से 350 रुपए तक मिलते हैं।

5. पैसा लाइव डॉट कॉम (www.Paisalive.com)

 अगर आप एक भी पैसा निवेश किए बिना तेजी से पैसा कमाना चाहते हैं तो यह वेबसाइट आपको ये मौका देती है। पैसा लाइव में अकाउंट बनाते ही आपको 99 रुपए मिलेंगे। अपने 10 दोस्तों को इसके बारे में बताकर उनका अकाउंट बनवाने पर भी आपको तुरंत 10 रुपए मिलेंगे। पहले 10 दोस्तों के बाद हर दोस्त पर आपको 2 रुपए मिलेंगे। इनबॉक्स में मेल पढ़ने पर आपको 25 पैसे से 5 रुपए तक मिलेंगे। वेबसाइट 15 दिन में एक बार चेक  पेमेंट करती है।

6. अमेजन मेकैनिकल टर्क पर हिट से कमाएं पैसा 

एम टर्क (अमेजन मेकैनिकल टर्क) एक मार्केट प्लैटफॉर्म है, जहां फ्रीलांसर और डेवलपर्स के तौर पर बिजनेस से संबंधित काम कराया जाता है। इस प्‍लैटफॉर्म पर कारोबार से संबंधित छोटे-छोटे काम होते हैं, जिसको ऑनलाइन पूरा कराया जाता है। इन सभी काम को अलग-अलग हिस्‍सों में बांटकर दिया जाता है और हिट के आधार पर उसका पेमेंट होता है। उदाहरण के तौर पर एक शॉपिंग बिल से किसी आइटम को निकालकर एक्‍सेल सीट में उसे जोड़ना होता है। ऐसे काम को पूरा करने में 3 मिनट से भी कम समय लगता है, जिसके लिए एम टर्क आपको 5 रुपए देती है। अमेजन मेकैनिकल टर्क डॉट कॉम के साथ काम शुरू करने के लिए आप https://www.mturk.com पर लॉग इन करके 60 हजार रुपए प्रतिमाह तक कमाए कर सकते हैं। वहीं, एम टर्क इस तरह के कई काम आपको घर बैठे अपनी सुविधा और समय के अनुसार करने की छूट देती है।


upwork एक ऐसा प्‍लैटफर्म है, जो अपने साथ छोटे-छोटे कारोबार के लिए इंडिविजुअल्स (व्‍यक्तिगत) डेवलपर्स और फ्रीलांसर को जोड़ने का काम करता है। यदि आप वेब  डिजाइनिंग, लोगो डिजाइनिंग के अलावा वर्डप्रेस वेबसाइट को डेवलप और मेंटेन करने की योग्‍यता रखते हैं, तो इसके साथ जुड़कर अच्‍छी कमाई कर सकते हैं। ओ डेस्‍क इस तरह के काम के लिए 300 रुपए तक प्रति घंटे के हिसाब से पेमेंट करती है। ओ डेस्‍क के साथ काम करने के लिए आपको https://www.upwork.com/ पर लॉग इन करना होगा।

8.स्‍क्रिप्‍टेड डॉट कॉम http://scripted.com 

 स्क्रिप्‍टेड फ्रीलांसर लेखकों का एक ऐसा नेटवर्क है, जिसकी वेबसाइट ऑनर जरूरत के मुताबिक कंटेंट को पोस्‍ट करते हैं। यदि आपकी अंग्रेजी बेहतर है और क्रिएटिव राइटिंग जानते हैं, तो 5 सौ शब्‍दों के कंटेंट के लिए 25 डॉलर यानी 1500 रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। इस नेटवर्क के साथ जुड़कर अच्‍छे अंग्रेजी लेखक 60 हजार रुपए प्रतिमाह तक कमा रहे हैं। आप भी इसके साथ जुड़ना चाहते हैं तो http://scripted.com पर लॉग इन करें।


9.फीवर डॉट कॉम https://www.fiverr.com

 फीवर डॉट कॉम एक यूनीक प्‍लैटफॉर्म हैं। यहां जुड़कर आप अच्‍छी कमाई कर सकते हैं। हालांकि, फीवर डॉट कॉम सिर्फ ऐसे काम ही करवाता है, जिनको पूरा करने की लागत 5 डॉलर तक आती है। अगर आप लोगो डिजाइन, लेखन और अनुवाद करने का काम जानते हैं, तो फीवर डॉट कॉम आपको हर काम के लिए 5 डॉलर देगा। इसके अलावा फीवर डॉट कॉम इसलिए भी पॉपुलर है, क्‍योंकि यह ऐसे लोगों को काम सौंपती है जो घर बैठे तय समय-सीमा में उसे पूरा कर सकें। अगर आप इसके साथ जुड़ना चाहते हैं तो https://www.fiverr.com पर लॉग इन करके पैसा कमाना शुरू कर दें।

10.इलैंस डॉट कॉम  https://www.elance.com 
 पैसे कमाने के लिए इलैंस डॉट कॉम सबसे बड़ी ऑनलाइन वेबसाइट है। इस कैटेगरी में यह सबसे पुरानी वेबसाइट्स में से एक है। इसे 1999 में शुरू किया गया था। एक अनुमान के मुताबिक, तकरीबन 20 लाख फ्रीलांसर इसके साथ नियमित रूप से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा पिछले साल ओ डेस्‍क डॉट कॉम का अधिग्रहण इलैंस ने कर लिया था। अभी दोनों वेबसाइटस करीब 80 लाख लोगों के साथ जुड़कर के 180 देशों में फ्रीलांस का काम कर रही है। जबकि इन वेबसाइटस का ऑनलाइन कारोबार तकरीबन1200 करोड़ रुपए का है। यदि आप भी घर बैठे https://www.elance.com के साथ काम करना चाहते हैं तो इस पर लाग इन करके हर महीने अच्‍छी कमाई कर सकते हैं।


































Tuesday, 12 January 2016

ऑनलाइन करा सकते हैं वोटर आई कार्ड में करेक्शन

ऑनलाइन करा सकते हैं वोटर आई कार्ड में करेक्शन, यह है प्रॉसेस
वोटर आईडी कार्ड में गलतियां होना आम बात है। पहले इन गलतियों को सही कराने के लिए निर्वाचन कार्यालय के काफी चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन अब आप आईडी कार्ड करेक्शन घर बैठे ऑनलाइन करा सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आपका नाम वोटर लिस्ट में होना जरूरी है।

वोटर लिस्ट में होना चाहिए नाम 
वोटर आई-डी कार्ड में करेक्शन तभी हो पाएगा, अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में होगा। वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर आप अपने कार्ड में करेक्शन नहीं हो पाएगा। इसके अलावा आप किसी और के वोटर आईडी कार्ड में करेक्शन नहीं कर पाएंगे। आप केवल अपने ही वोटर आईडी कार्ड में अपना करेक्शन करा सकते हैं।

करेक्शन के स्टेप्स

STEP-1
 सबसे पहले करे निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर लॉगइन सबसे पहले आपको निर्वाचन आयोग की वेबसाइट www.nvsp.in पर लॉग-इन करना होगा। यहां पर जाकर आप को करेक्शन इन वोटर रोल केऑइकन पर क्लिक करना होगा। इस लिंक पर क्लिक करने के बाद आपकी स्क्रीन पर पेज खुलेगा, जिस पर आपको फॉर्म 8 के लिंक पर क्लिक करना होगा। इस लिंक को क्लिक करने के बाद एक नया पेज खुलेगा।


STEP-2

फॉर्म में भरें अपनी सारी जानकारी
नए पेज में एक नया फॉर्म आपको अपनी स्क्रीन पर दिखेगा। इस फॉर्म में आपको अपनी सारी जानकारी भरनी होगी। इस फॉर्म में जानकारी भरते समय किसी भी तरह की कोई गलती ना करें। याद रखिए कि आप इस फॉर्म को करेक्शन कराने के लिए भर रहे हैं। इसलिए किसी भी डिटेल्स को भरने में सावधानी रखें।

STEP-3
 वोटर आईडी कार्ड को रखें पास में 
आप अपने पुराने वोटर आईडी कार्ड को फॉर्म भरते वक्त साथ में रखें क्योंकि इससे ही आप यह देख पाएंगे कि आपको क्या करेक्शन कराना है। आपके पुराने वोटर आईडी में जो भी गलती हो इसको आप देखकर के करेक्शन करा सकेंगे।


STEP-4
 फोटो का भी कर सकते हैं करेक्शन 
अगर आपके वोटर आईडी कार्ड में सारी डिटेल्स सही हैं, लेकिन फोटो में गड़बड़ी है तो आप उसको भी घर बैठे ऑनलाइन सही कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपना कलर फोटो व्हाइट बैकग्राउंड में अपलोड करना होगा। किसी और कलर बैकग्राउंड में फोटो को अपलोड नहीं करें, क्योंकि यह निर्वाचन आयोग की तरफ से रिजेक्ट हो जाएगा। 


STEP-5
 चुनाव के वक्त हो जाएगा कार्ड में अपडेट
 निर्वाचन आयोग समय-समय पर अपडेटेड वोटर लिस्ट का प्रकाशन करता रहता है। आयोग राज्यों में चुनाव के वक्त इस लिस्ट को प्रकाशित करता है। करेक्शन करने के बाद चुनाव से पहले आपके पास अपडेटेड वोटर आईडी कार्ड आपके घर पहुंच जाएगा।






















Monday, 11 January 2016

ऑनलाइन बनवाएं कलर वोटर आईडी कार्ड

ऑनलाइन बनवाएं कलर वोटर आईडी कार्ड, फॉलो करें ये STEPS... 

आप स्मार्टफोन या लैपटॉप की मदद से कलर वोटर आईडी कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं। एक महीने के अंदर आपको अपना वोटर कार्ड भी मिल जाएगा।  


इसके लिए आपको इन 5 स्टेप्स को फॉलो करना होगा। 

 स्टेप-1.
रजिस्ट्रेशन से करें शुरुआत वोटर आई-डी कार्ड बनवाने से पहले आपके पास पर्सनल ई-मेल आई-डी और मोबाइल नंबर होना चाहिए, जिससे चुनाव आयोग को आपसे संपर्क करने में आसानी हो। कभी भी ऑफिस की मेल आई-डी आप ना दें। सबसे पहले आपको चुनाव आयोग की वेबसाइट http://www.nvsp.in पर जाना होगा। यहां न्यू रजिस्ट्रेशन के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।


 स्टेप-2. कलर पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ करें अपलोड
ऑप्शन पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक पेज खुलेगा जिस पर आप अपनी सभी जानकारी को सावधानीपूर्वक भरें। वोटर आईडी कार्ड बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इसलिए कोई भी गलत जानकारी भरने से बचें। गलत जानकारी देने पर चुनाव आयोग आपको जेल भी भेज सकता है। इसमें आपको अपनी कलर पासपोर्ट साइज फोटो जो कि व्हाइट बैकग्राउंड में होनी चाहिए वो भी अपलोड करनी होगी।

स्टेप-3. जानकारी को कर सकते हैं चेंज
फॉर्म सेव करने के बाद आप इसको सबमिट करेंगे। सबमिट करने के 15 दिन तक आप अपनी डिटेल्स में चेंज कर सकते हैं। आप अपने वोटर आई-डी कार्ड एप्लिकेशन का स्टेटस भी ऑनलाइन चेक भी कर सकते हैं।

 स्टेप-4. इन डॉक्युमेंट्स की स्कैन कॉपी करनी होगी अपलोड
वोटर आई-डी कार्ड के लिए आपको एड्रेस प्रूफ और आई-डी प्रूफ में अलग-अलग डॉक्युमेंट्स की कॉपी अपलोड करनी पड़ेगी। इसके लिए आप पासपोर्ट, दसवीं की मार्कशीट, बर्थ सर्टिफिकेट, पैन कार्ड,ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, बैंक की पासबुक, फोन/पानी/बिजली/गैस का बिल, इनकम टैक्स का फॉर्म 16 आदि में से किन्हीं दो डॉक्युमेंट्स की स्कैन कॉपी को अपलोड करना होगा। 

 स्टेप-5. एक माह में मिलेगा वोटर आई-डी कार्ड
जानकारी देने के बाद चुनाव आयोग की तरफ से नियुक्त आपके एरिया का बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) आपके घर पर आएगा और जिन डॉक्युमेंट्स को आपने अपलोड किया है उनको चेक करेगा और इन डॉक्युमेंट्स की हार्ड कॉपी को वेरिफाई करने के लिए ले जाएगा। इसके बाद एक माह के अंदर पोस्ट द्वारा आपके घर पर वोटर आई-डी कार्ड पहुंच जाएगा।














Aajeevika Skills


WHAT is Aajeevika Skills?

Aajeevika Skill: Making Rural Poor Youth Employable

Aajeevika- National Rural Livelihood Mission (NRLM) is an initiative launched by Ministry of Rural Development (MoRD), Government of India in June 2011. The Aajeevika Skill is a sub-mission under NRLM. It has evolved out of the need to:
•  cater to the occupational aspirations of the rural youth who are poor and
•  to diversify incomes of the rural poor.

ASDP gives young people from poor communities an opportunity to upgrade their skills
and enter the skilled work force in growing sectors of the economy. Training and
placementschemesare run in partnership with public, private, nongovernment and
community organizations.
Strong relationships are being built with industry associations and employers’. The
target is to skill and place 50 lakhs youth in the formal sector by 2017.

Key Features 

•  Provides customized residential and non residential training 
•  Minimum 624 hours of training with modules on trade specific skills, IT and soft skills. 
•  Special programs for Jammu and Kashmir, Minorities and Most critical Left wing
    Extremist Districts 

•  Implemented under the supervision of the central and state governments  
•  75% assured placement above minimum wages 
•  Post placement support 
•  Food and transport support during training

WHY Aajeevika Skills?
Aajeevika Skills is needed because India enjoys the advantage of having the world’s
largest population of young people. If we invest adequately in their education and
employability, this youth power has the potential to transform the Indian economy.
Turning this potential into reality is one of the most significant initiatives that the
Central and the State governments need to take have embarked upon. One estimate
has it that India has the capacity to create 500 million skilled and certified technicians
by the year 2022. If this is done it would make India’s growth more inclusive and shared.